प्रज्ञानन्दा बने सेंट लुईस रैपिड एवं ब्लिट्ज के विजेता !
भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानन्दा ने ग्रैंड चैस टूर 2026 के चौथे चरण सेंट लुईस रैपिड एवं ब्लिट्ज का खिताब अपने नाम करते हुए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। प्रज्ञानन्दा ने अंतिम दिन से एक राउंड पहले ही खिताब अपने नाम कर लिया और पूरे पांच दिनों तक लगातार शीर्ष स्थान पर बने रहने वाले एकमात्र खिलाड़ी रहे। इस शानदार जीत के साथ उन्होंने 50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 43 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि और 13 ग्रैंड चैस टूर अंक भी अपने नाम किए। पढ़े यह लेख. तस्वीरे : सेंट लुईस चैस क्लब

प्रज्ञानन्दा नें पूरे टूर्नामेंट में बनाए रखी बादशाहत
पूरे टूर्नामेंट में प्रज्ञानन्दा और उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। अंतिम दिन सिंदारोव कई बार अंतर कम करने में सफल रहे, लेकिन प्रज्ञानन्दा ने हर चुनौती का मजबूती से सामना किया। अंततः उन्होंने 1.5 अंकों की बढ़त के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि सिंदारोव दूसरे और अमेरिका के वेस्ली सो तीसरे स्थान पर रहे।
एक राउंड पहले ही तय हो गया चैंपियन
ब्लिट्ज के अंतिम दिन प्रज्ञानन्दा की शुरुआत अच्छी नहीं रही और दूसरे मुकाबले में उन्हें अवोंडर लियांग के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद सिंदारोव उनसे केवल आधा अंक पीछे रह गए और मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया।
हालांकि इसके बाद प्रज्ञानन्दा ने शानदार वापसी करते हुए अनीश गिरी और योर्डन वान फॉरेस्ट के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। दूसरी ओर सिंदारोव को फैबियानो कारुआना के हाथों हार का सामना करना पड़ा, जिससे भारतीय खिलाड़ी ने फिर बढ़त बना ली।
निर्णायक मुकाबला रहा सिंदारोव के खिलाफ ड्रॉ

टूर्नामेंट का सबसे अहम मुकाबला ब्लिट्ज के 17वें राउंड में प्रज्ञानन्दा और सिंदारोव के बीच खेला गया। इस समय प्रज्ञानन्दा को खिताब सुनिश्चित करने के लिए केवल ड्रॉ की जरूरत थी। मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी एक प्यादा पीछे थे, लेकिन उन्होंने हाथी और घोड़े के एंडगेम में शानदार बचाव करते हुए मुकाबला ड्रॉ करा लिया। इसी परिणाम के साथ उन्होंने एक राउंड पहले ही टूर्नामेंट अपने नाम कर लिया।
अंतिम राउंड में प्रज्ञानन्दा ने लेवोन अरोनियन से ड्रॉ खेलकर कुल 1.5 अंकों की बढ़त के साथ प्रतियोगिता समाप्त की।
रैपिड और ब्लिट्ज दोनों में रहे सर्वश्रेष्ठ

इस जीत की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि प्रज्ञानन्दा ने केवल सयुंक्त खिताब ही नहीं जीता, बल्कि रैपिड और ब्लिट्ज दोनों वर्गों में सबसे अधिक अंक भी हासिल किए। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य दोनों चरणों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था और वह इसे हासिल कर बेहद खुश हैं।

प्रज्ञानन्दा ने कहा, "स्कोर देखकर सब कुछ आसान लगता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था। यह बेहद कठिन टूर्नामेंट था। सिंदारोव ने आखिर तक शानदार संघर्ष किया और मुझे लगातार दबाव में रखा।"